जब भी कोई नया इंसान पैसे बढ़ाने के लिए शेयर मार्केट की तरफ आता है तो सबसे पहले उसके दिमाग में यही सवाल घूमता है कि ट्रेडिंग करनी चाहिए या इन्वेस्टिंग करनी चाहिए। बाहर से देखने पर दोनों एक जैसे लगते हैं क्योंकि दोनों में शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं, लेकिन असल में इन दोनों का तरीका, सोच और रिज़ल्ट पूरी तरह अलग होता है। ट्रेडिंग में लोग जल्दी मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं जबकि इन्वेस्टिंग करने वाले सालों तक इंतज़ार करके अपने पैसे को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं। अब सवाल उठता है कि शुरुआत करने वाले यानी beginners के लिए कौन सा रास्ता सही है।
ट्रेडिंग की बात करें तो यह एक तरह से रोज़ का काम है। ट्रेडर अक्सर दिन में कई बार शेयर खरीदते और बेचते हैं। उनका मकसद छोटी-छोटी प्राइस मूवमेंट से मुनाफा कमाना होता है। जैसे मान लो किसी कंपनी का शेयर सुबह 100 रुपये का है और दोपहर तक 103 रुपये हो जाता है, तो ट्रेडर वही शेयर खरीदकर तुरंत बेच देगा और 3 रुपये का फायदा कमा लेगा। अगर दिन में कई बार ऐसा किया जाए तो मुनाफा बढ़ सकता है। ट्रेडिंग में दिमाग बहुत तेज़ लगाना पड़ता है क्योंकि हर पल मार्केट ऊपर-नीचे होता रहता है। इसके लिए चार्ट पढ़ना, पैटर्न समझना और न्यूज पर तुरंत रिएक्ट करना जरूरी होता है। लेकिन इसके साथ रिस्क भी बहुत बड़ा होता है। अगर आपकी भविष्यवाणी गलत हो जाए तो नुकसान भी उतना ही जल्दी हो सकता है। यही वजह है कि ट्रेडिंग को एक तरह का फुल-टाइम काम माना जाता है, जिसमें लगातार ध्यान और मेहनत चाहिए।
इसके उलट इन्वेस्टिंग का खेल बिल्कुल अलग है। इसमें लोग किसी अच्छे शेयर या म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं और सालों तक इंतज़ार करते हैं। उनका मकसद रोज़ का मुनाफा नहीं होता बल्कि लंबी अवधि में बड़ा फायदा कमाना होता है। जैसे अगर आपने किसी कंपनी का शेयर 100 रुपये का खरीदा और 10 साल बाद वही 500 रुपये का हो गया तो आपका पैसा 5 गुना हो गया। इन्वेस्टिंग में धैर्य की जरूरत होती है। आपको मार्केट के छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव से फर्क नहीं पड़ना चाहिए। यहां रिस्क कम होता है क्योंकि लंबे समय में अच्छे शेयर और फंड्स अक्सर ऊपर ही जाते हैं। यही वजह है कि वॉरेन बफेट जैसे बड़े-बड़े निवेशक हमेशा इन्वेस्टिंग को प्राथमिकता देते हैं।
अगर हम ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग की तुलना करें तो ट्रेडिंग को तेज़ रफ्तार वाली बाइक और इन्वेस्टिंग को लंबी दूरी की ट्रेन यात्रा कहा जा सकता है। बाइक पर आप तेज़ जा सकते हैं, जल्दी पहुंच सकते हैं लेकिन गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है। वहीं ट्रेन धीरे-धीरे चलती है लेकिन सुरक्षित तरीके से आपको मंज़िल तक पहुंचा देती है। शुरुआती लोग अक्सर जल्दी अमीर बनने के चक्कर में ट्रेडिंग की तरफ भागते हैं, लेकिन बिना अनुभव और सही स्ट्रेटेजी के वे जल्दी नुकसान झेल लेते हैं। इसके विपरीत इन्वेस्टिंग शुरुआती लोगों के लिए ज्यादा सही मानी जाती है क्योंकि इसमें सीखने का समय भी मिलता है और पैसे धीरे-धीरे सुरक्षित तरीके से बढ़ते रहते हैं।
एक और फर्क है मानसिक शांति का। ट्रेडिंग करने वाले हर समय मार्केट पर नजर रखते हैं। अगर शेयर ऊपर जाता है तो खुशी और नीचे आता है तो तनाव। यह रोज़ की टेंशन कई बार नींद और दिमाग दोनों खराब कर देती है। वहीं इन्वेस्टिंग करने वाले लोग एक बार पैसा लगाते हैं और फिर उसे भूल जाते हैं। उन्हें बस इतना भरोसा होता है कि लंबी अवधि में उनका पैसा बढ़ेगा। इस वजह से उनका जीवन ज्यादा संतुलित और शांत रहता है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ट्रेडिंग बेकार है। अगर किसी को मार्केट समझने का शौक है, तेजी से डिसीजन लेने की आदत है और रिस्क उठाने की हिम्मत है तो ट्रेडिंग भी बहुत फायदे का सौदा हो सकता है। बहुत से प्रोफेशनल ट्रेडर्स हर महीने लाखों रुपये कमाते हैं। लेकिन उन्होंने इसके लिए सालों मेहनत की है, चार्ट पढ़ने की कला सीखी है और रिस्क मैनेजमेंट को समझा है। बिना इन सबके ट्रेडिंग शुरू करना वैसा ही है जैसे बिना तैरना जाने गहरे पानी में कूद जाना।
Beginners के लिए सबसे समझदारी का रास्ता यही है कि पहले इन्वेस्टिंग से शुरुआत करें। म्यूचुअल फंड SIP या कुछ अच्छे स्टॉक्स में लंबी अवधि के लिए पैसा लगाएं। इससे आप मार्केट की बेसिक समझ हासिल कर लोगे और धीरे-धीरे आपका पैसा भी बढ़ेगा। जब आपको अनुभव हो जाए और रिस्क झेलने की क्षमता आ जाए तब आप थोड़ा-थोड़ा करके ट्रेडिंग की तरफ भी बढ़ सकते हो।
आखिरकार ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग दोनों ही पैसे बढ़ाने के रास्ते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि एक रास्ता छोटा लेकिन रिस्की है और दूसरा लंबा लेकिन सुरक्षित। अगर आप नए हो तो पहले लंबा और सुरक्षित रास्ता चुनो यानी इन्वेस्टिंग, और फिर जैसे-जैसे अनुभव बढ़े वैसे-वैसे ट्रेडिंग को भी सीख सकते हो। जो लोग दोनों का बैलेंस बनाना सीख जाते हैं वही असली जीत हासिल करते हैं।