10 बेस्ट इंडिकेटर फॉर ऑप्शन ट्रेडिंग | Best Indicators for Options Trading in India

10 बेस्ट इंडिकेटर फॉर ऑप्शन ट्रेडिंग | Best Indicators for Options Trading in India
ऑप्शन ट्रेडिंग जो एक हाई रिस्क हाई रिवॉर्ड वाली ट्रेडिंग है, और शेयर बाजार में सबसे ज्यादा लोग जो ट्रेडिंग करते हैं, वो ऑप्शन ट्रेडिंग ही है, क्यूंकि इसमें आपको कम पैसों की जरूरत होती है और आपको फायदा बहुत ज्यादा हो सकता है, लेकिन इस ट्रेडिंग में आपको सही इंडीकेटर्स को जानने की जरूरत है, जो आपको किसी शेयर का प्राइस प्रेडिक्ट करने में मदद कर सकें | इसलिए आज के इस ब्लॉग में मैं आपको 10 बेस्ट इंडिकेटर फॉर ऑप्शन ट्रेडिंग बताने वाला हूँ जिन्हे आपको एक बार जरूर जानना चाहिए, ताकि आप ऑप्शन ट्रेडिंग बड़ा लाभ कमा सकें |  

तो चलिए जानते हैं -  Best Indicators for Options Trading in India

10 बेस्ट इंडिकेटर फॉर ऑप्शन ट्रेडिंग | Best Indicators for Options Trading in India

10 बेस्ट इंडिकेटर फॉर ऑप्शन ट्रेडिंग | Best Indicators for Options Trading in India  
ऑप्शन ट्रेडिंग से अच्छा लाभ कमाने के लिए आपको कुछ जरूरी इंडीकेटर्स के बारे में जानना जरूरी है | यहाँ मैंने आपको जो 10 इंडिकेटर बताये हैं, वो आपको ऑप्शन ट्रेडिंग से लाभ कमाने में काफी मदद कर सकते हैं |  

भारत में ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए 7 सर्वश्रेष्ठ संकेतक
  1. Implied Volatility 
  2. Open Interest 
  3. Bollinger Bands 
  4. Volume Option 
  5. Moving Average 
  6. Relative Strength Index(RSI) 
  7. Intraday Momentum Index (IMI)
  8. Money Flow Index (MFI) 
  9. Put-Call Ratio (PCR) Indicator 
  10. Supertrend indicator
ऑप्शन ट्रेडिंग करने के लिए ये 10 ऐसे इंडीकेटर्स हैं, जिन्हे सीखकर आप ऑप्शन ट्रेडिंग से बहुत अच्छा लाभ कमा सकते हैं | 

1. Implied Volatility

Implied Volatility जिसे आप ऑप्शन चैन में आसानी से देख सकते हैं, ऑप्शन ट्रेडिंग में Implied Volatility (IV) देखकर लोग यह अंदाजा लगाते हैं, कि कुछ समय बाद यानी भविष्य में शेयर की कीमत में कितना बदलाव आ सकता है। 

यदि IV ज्यादा होने का मतलब होता है, की शेयर का प्राइस बहुत ज्यादा ऊपर या नीचे हो सकता है। इसके दूसरी तरफ यदि IV कम होती है, तो यह माना जाता है, कि शेयर का प्राइस भविष्य में ज्यादा नहीं बदलेगा। और iv किसी भी शेयर या इंडेक्स के ऑप्शन के प्राइस में काफी प्रभाव सालता है। 

जब भी IV बढ़ते हैं, तो ऑप्शन भी महंगे हो जाते हैं, और जब IV कम होता है, तो ऑप्शन की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिलती है | पढ़ें - शेयर मार्किट चार्ट कैसे समझे– शेयर मार्किट चार्ट एनालिसिस

 2. Open Interest (OI)

ऑप्शन ट्रेडिंग में Open Interest (OI) हमे बताता है, की अभी भी मार्किट में कितने ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स खुले हुए हैं, जिनमें ना ट्रेड किया गया है और न ही अभी वो ऑप्शन खत्म हुए हैं। और यह संख्या हमे बताती है, कि कितने लोगों ने अभी तक अपने ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स क्लोज नहीं किये है। 

किसी ऑप्शन में Open Interest का बढ़ना इस बात का संकेत है, कि बड़ी मात्रा में लोग नए कॉन्ट्रैक्ट्स खरीद या बेच रहे हैं। इसके दूसरी तरफ यदि किसी वजह से Open Interest घाट रहा है, तो यह इस बात का संकेत है, की लोग कॉन्ट्रैक्ट्स को क्लोज कर रहे हैं। 

Open Interest देखकर हम यह अंदाजा लगा सकते हैं, की ऑप्शन को लोग कितना पसंद करते है, और कितने लोग किस ऑप्शन में ट्रेड कर रहे हैं। पढ़ें - macd indicator in hindi | एकतरफा बाज़ार के लिए सबसे अच्छा इंडिटरके

3. Bollinger Bands 

Bollinger Bands टेक्निकल एनालिसिस का उपकरण है, इस इंडिकेटर का उपयोग स्टॉक की कीमतों के उतार-चढ़ाव को समझने के लिए किया जाता है। इस इंडीकेटर्स में आपको तीन लाइन देखने को मिलती हैं, एक लाइन बीच में और दो बीच दो बाहरी लाइनें होती। 

यह बीच वाली लाइन मूविंग एवरेज लाइन होती है, जो आपको किसी शेयर चार्ट प्राइस का औसत बताती है। और इसकी बाहर वाली लाइनें मूविंग एवरेज लाइन से कुछ दूरी पर पर साथ में चलती हैं, इन लाइनों की  यह दूरी शेयर के प्राइस volatility पर डिपेंड करती है। 

जब शेयर की कीमत बाहर वाली लाइनों के आस - पास होती हैं, तो इससे पता चलता है, कि शेयर की कीमत बहुत ज्यादा या बहुत कम हो सकती हैं। Bollinger Bands इंडिकेटर को सीखकर व देखकर हम समझ सकते है, की शेयर की कीमतो में कब ज्यादा बदलाव आ रहा हैं। पढ़ें - स्विंग ट्रेडिंग के लिए स्टॉक कैसे चुने

4. Volume ऑप्शन

ऑप्शन ट्रेडिंग में ऑप्शन Volume को देखने से आपको पता लगेगा की किसी दिन कितने ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स खरीदे या बेचे गए हैं। या कहें, किसी ऑप्शन को ट्रेड को कितनी बार ट्रेड किया गया है। किसी ऑप्शन का Volume हाई होना यह बताता है, की लोग उस ऑप्शन में भरी मात्रा में ट्रेड कर रहे है | 

इसकी दूसरी तरफ किसी ऑप्शन का Volume कम होना आपको यह बताता है, की ऑप्शन में बहुत कम लोगों द्वारा ट्रेड किया जा रहा हैं। Volume देखकर हमें यह समझने में आसानी होती है, कि किस ऑप्शन में कितनी एक्टिविटी हो रही है और ट्रेडर्स उस ऑप्शन को बहुत ज्यादा buy कर रहे हैं, या sell। जिससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी की ऑप्शन को खरीदना चाहिए या बेचना चाहिए | पढ़ें - ट्रेडिंग के 6 प्रकार क्या हैं? | ट्रेडिंग के प्रकार | 6 types of trading

5. Moving Average

ऑप्शन ट्रेडिंग में Moving Average हमे किसी शेयर की एक तय समय जैसे 10, 20 या 50 दिन की कीमत का एवरेज निकालने में मदद करती हैं। उदाहरण से समझे तो - पिछले 10- दिनों का Moving Average आपको पिछले 10 दिन की कीमतों का एवरेज दिखाता है। साथ ही ये हमें स्टॉक की कीमत आगे कैसे चलने वाली है, उसे समझने में मदद करता है। 

यदि शेयर की कीमत Moving Average से ऊपर है, तो इससे पता चलता है,शेयर की कीमत बढ़ रही है। दूसरी तरफ यदि शेयर की कीमत Moving Average से नीचे चल रही है, तो यह बताता है, कि शेयर की कीमत गिर रही है। Moving Average देखने से हम यह समझ पाते हैं, कि किसी शेयर कि कीमत कीमत किस दिशा में जा रही है और यदि आप मूविंग एवरेज को अच्छे से देखना सीख जाते हैं, तो आप अपने ट्रेडिंग निर्णय ज्यादा अच्छे से ले सकते हैं। पढ़ें - Trading kaise sikhe |  पूरी जानकारी in hindi 

6. Relative Strength Index (RSI) 

Relative Strength Index (RSI) एक बहुत ही जाना माना इंडिकेटर है, जिसे हर बड़े ट्रेडर ने कभी न कभी तो जरूर उपयोग किया होगा, इसे एक स्केल पर 0 से 100 के बीच मापा जाता है। यदि किसी शेयर में RSI 70 से ऊपर है, तो यह संकेत है की स्टॉक 'ओवरबॉट' यानी बहुत ज्यादा खरीदा गया है | 

जिससे शेयर की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ गई है, और अब यह कीमत गिर सकती है। और यदि RSI 30 से नीचे है,  तो यह संकेत है की शेयर 'ओवरसोल्ड' यानी बहुत ज्यादा बेचा गया है, जिससे इसकी कीमते बहुत ज्यादा गिर चुकी है, और अब ये कीमत बढ़ सकती है। 

RSI का को देखकर ट्रेडर्स शेयर की कीमत में बदलाव आने की संभावना का अनुमान लगाते है, ताकि ट्रेडर उस शेयर में सही समय पर खरीद या बेच सकें। पढ़ें -  भारत का सबसे अच्छा ट्रेडिंग ऐप |

7. Intraday Momentum Index

Intraday Momentum Index (IMI) जो की एक टेक्निकल इंडिकेटर है, जिसे देखकर आप यह अंदाजा लगा सकते हैं, की किस शेयर की कीमत एक दिन में कितनी ऊपर या नीचे जा सकती है। यह इंडिकेटर Relative Strength Index (RSI) के जैसे ही होता है, लेकिन IMI केवल एक दिन के अंदर किसी शेयर की कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापने का काम करता है।

IMI का मान भी 0 से 100 के बीच होता है। यदि IMI का मान 70 से ज्यादा होता है, तो यह संकेत है, की उस शेयर की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है, और कुछ ही समय में गिर सकती है। वहीँ यदि IMI, 30 से नीचे होना यह संकेत है, की शेयर की कीमत बहुत ज्यादा नीचे जा चुकी है और कुछ ही समय में अब बढ़ सकती है।

ट्रेडर्स IMI का उपयोग करके यह अंदाजा लगते हैं, की दिन में शेयर की कीमत किस दिशा में जाने की सम्भावना है, ताकि वे सही समय में ट्रेड ले सकें।

8. Money Flow Index (MFI)

मनी फ्लो इंडेक्स (MFI) एक ऐसा इंडिकेटर है, जो किसी शेयर की कीमत और वॉल्यूम दोनों को जोड़कर काम करता है। इस इंडिकेटर को वॉल्यूम-वेटेड आरएसआई के नाम से भी जाना जाता है। MFI किसी तय समय (आमतौर पर 14 दिन) में किसी शेयर में ट्रेड के द्वारा कितना पैसा आ रहा है, और कितना पैसा जा रहा है, बताने का काम करता है, जिससे यह पता लगाने में मदद मिलती है, की किसी शेयर में कितना ट्रेड किया जा रहा है | 

यदि किसी शेयर में MFI - 80 से ज्यादा होता है, तो यह संकेत है, की शेयर को भरी मात्रा में buy किया है, और कुछ समय में शेयर की कीमत नीचे जा सकती है। वहीँ यदि MFI - 20 से नीचे होता है, तो यह संकेत है, की शेयर को बहुत सारे लोगों द्वारा भरी मात्रा में बेचा गया है, और कुछ ही समय में अब शेयर की कीमत बढ़ सकती है।

इसके अलावा जब किसी शेयर में MFI शेयर की कीमत के उलटी दिशा में चल रहा होता है, तो यह बताता है, कि कुछ ही समय में अब शेयर की कीमत की दिशा में बदलाव आ सकता है। इस तरह देखा जाय तो MFI ऑप्शन ट्रेडिंग में कीमत का अनुमान व दिशा पहले से पता करने के लिए बहुत अच्छा इंडिकेटर है।

9. पुट-कॉल रेश्यो

पुट-कॉल रेश्यो एक ऐसा इंडिकेटर है, जो पुट और कॉल ऑप्शन्स के ट्रेडिंग वॉल्यूम की माप करता है। यानी की शेयर बाजार में किसी शेयर के कितने पुट ऑप्शन्स खरीदे जा रहे हैं, और कितने कॉल ऑप्शन्स। पुट-कॉल रेश्यो में आने वाला बदलाव बताता है, की शेयर बाजार में ट्रेड कर रहे लोगों की भावनाओं में बदलाव हो रहा है, न कि इसके यह ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए बहुत अच्छा संकेतक है।

जब पुट की तुलना में कॉल ऑप्शन्स की ज्यादा खरीददारी हो रही होती हैं, तो इसका रेश्यो मान 1 से ज्यादा होता है, जो की बाजार में तेजी का एक संकेत है। वहीँ जब पुट ऑप्शन्स, कॉल ऑप्शन्स से ज्यादा खरीदे जाते है, तो रेश्यो मान 1 से कम होता है, जो शेयर में मंदी को बताता है।

आज हमने क्या सीखा -

आज के ब्लॉग में हमने आज 10 बेस्ट इंडिकेटर फॉर ऑप्शन ट्रेडिंग | Best Indicators for Options Trading in India तक के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की तथा अन्य बातेँ भी हमने सीखी। 

आशा करता हूँ आपको हमारे द्वारा दी गई ये जानकारी बहुत काम आय। हमारे द्वारा दी गई इस जानकारी को पढ़ने के लिए अपना कीमती समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 🙏😊

यदि आपको जिओ इंडिकेटर फॉर ऑप्शन ट्रेडिंग से जुडी कोई जानकारी चाहिए तो आप comment करके हमे बता सकते। हम जल्द ही आपके लिए जानकारी लाने की कोशिस करेंगे। 

About the Author

I am Pranshu Soni, I am a blogger and I give information about Investment, Trading, Share Market Concept, Share Price Target, And Best Share to people in my blog.

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